शनिवार, 1 अप्रैल 2017

हमें अपने निर्णय खुद लेने की हिम्मत करनी चाहिए






अपनी अंत : प्रेरणा  से निर्णय लें | तब आप की गलतियाँ  आपकी अपनी होंगीं , न की किसी और की  - बिली  विल्डर
                                  जीवन अनिश्चिताओं से भरा पड़ा है | ऐसे में हर कदम - कदम हमें  निर्णय लेने पड़ते हैं | कुछ निर्णय इतने मामूली होते हैं की उन  का हमारी आने वाली जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ता | पर कुछ निर्णय बड़े होते हैं | जो हमारे आने वाले समय को प्रभावित करते हैं | ऐसे समय में हमारे पास दो ही विकल्प  होते हैं | या तो हम अपनी अंत : प्रेरणा की सुने | या दूसरों की राय का अनुसरण करें | जब हम दूसरों की राय का अनुकरण करते हैं तब हम कहीं न कहीं यह मान कर चलते हैं की दूसरा हमसे ज्यादा जानता है | इसी कारण  अपनी " गट फीलिंग " को नज़र अंदाज़ कर देते हैं |  वो निर्णय जिनके परिणाम भविष्य के गर्त में छुपे हुए हैं | उनके बारे में कौन कह सकता है की क्या सही सिद्ध होगा क्या गलत | कौन कह सकता है की आज  हम जिस बच्चे के कैरियर के लिए सलाह ले या दे  रहे हैं उस पर आगे चल कर उसे सफलता मिलेगी ही

बुधवार, 29 मार्च 2017

व्यक्ति के काम उसके शब्दों से कहीं ज्यादा तीव्र स्वर में बोलते हैं


जब लोग आप को अपने बारे में बताते हैं  उन पर विश्वास  करो - माया एंजिलो 


                         ईश्वर ने मनुष्य को वाणी का वरदान दिया है | और वाणी ही उसकी अभिव्यक्ति का  माध्यम है | और वाणी ही उसे सबसे ज्यादा उलझाती भी है | कोई आपसे बात कर के चला जाता है उसके बाद हर बात की विवेचना शुरू  होती है | उसने ऐसा क्यों कहा | उसके पीछे उसका क्या प्रयोजन था | उसकी इस बात में मुझे नीचा दिखाने की साजिश थी | उसकी उस बात में मेरा उपहास करने का भाव था | आदि , आदि | दो लोगों का परस्पर संवाद सौहार्द बढाने के स्थान पर विषाद  बढ़ा देता है | जब हम बात करते हैं तो दो ध्रुव बन जाते हैं | एक बोलने वाला एक सुनने वाला | बोलने वाला अपने पूर्व अनुभव से बोल रहा होता है व् सुनने वाला अपने पूर्व अनुभव के आधार पर बात समझने की कोशिश कर रहा होता है | अपने - अपने स्थान पर खड़े होकर हम दूसरे के बारे में धारणाएं बना लेते हैं | पर क्या वो सही बन पाती हैं ?

मंगलवार, 28 मार्च 2017

परायी






गेंदा , गुडहल , गुलाब , कमल कभी किसी फूल को देखकर जब आपके मन में प्यार उमड़ता है तो क्या आप उसकी " बोटैनिकल फैमली " के बारे में पूंछते हैं | कभी किसी गाय , बकरी बिल्ली पर प्यार से हाथ फेरते हुए सोंचते हैं की वो किस नस्ल की है | पर जब बात इंसानों की आती है तो हम सगे यानी की खून से जुड़े  रिश्तों को ही प्राथमिकता देते हैं | पर रिश्ते तो  ऊपर वाला बनाता है | चाहे वो खून से जुड़े हों या नहीं | तभी तो हमारे खून के रिश्तों के अतरिक्त न जाने कितने रिश्ते यूँ ही बन जाते हैं |  कुछ में खाली जान पहचान होती है , तो कुछ आत्मा के स्तर तक जुड़ जाते हैं |
 ऐसा ही एक रिश्ता था मेरा दीदी से | जो सगा न होते हुए भी सगों से बढ़ कर था | 
                दीदी मेरी सगी बहन नहीं थी | पर भाई - बहन का रिश्ता सगे संबंधों से ऊपर था |बिलकुल आत्मा से जुड़ा |  कानपुर में मेरी एक छोटी सी दूकान थी | वहीँ पास में  दीदी के कुछ रिश्तेदार रहते थे | जिनसे मिलने वो अक्सर आया करती थी | यूँ तो दीदी कलकत्ते में रहने वाली थी |एक बार अपने रिश्तेदारों के साथ वो मेरी दुकान पर भी सामन खरीदने आयीं | उनको देख कर मन न जाने क्यों उन्हें दीदी कहने का हुआ | वैसे कानपुर के  दुकानदारों के लिए ये आम बात  होती है | वो हर महिला को दीदी , अम्मा  , भाभी , बुआ कह कर एक रिश्ते में बाँधने की कोशिश करते हैं | आमतौर पर महिलाएं भी इसे पसंद करती हैं | परन्तु मेरा मानना अलग था | मैं , मनसा वाचा कर्मणा में विश्वास रखता था | जिसे मन से मानो उसे ही रिश्तों का नाम दो | ताकि रिश्ते केवल दिखावटी न रह सकें | इसलिए मैं महिलाओं को मैंम कह कर ही संबोधित करता था |

सोमवार, 27 मार्च 2017

जूनून - जिन्दा रहने का दूसरा नाम





पैशन एक उर्जा है ... उस उर्जा को महसूस करिए जो उस समय महसूस होती है जब आप वो काम करते हैं जो आप को उद्द्वेलित करता है - ओप्राह विनफ्रे 
                               पैशन या जूनून अपने आप में किसी व्यक्ति की पूरी परिभाषा है | और हमारे जिन्दा होने का सबूत भी | एक ऐसा काम जो काम न होकर खेल लगे |  पैशन  वो काम है जिसे करने में आनंद आये | आत्मा डूब जाए ध्यान या मैडीटेशन  की अवस्था आ जाए | पैशन की भूमिका कुछ करने या केवल खुशी के पलों में नहीं हैं | जीवन के नकारात्मक पलों में ये बहुत बड़ा मदगार बनता है |
                                              वस्तुत : जीवन उतार चढाव का नाम है | जीवन में कई पल ऐसे आते हैं | जिसमें ऐसा लगता हैं जैसे साँसे चुक गयी हों  या हम जीवित तो हैं पर हमारे अंदर बहुत कुछ मर गया है | वो पल घनघोर निराशा के होते हैं | किसी बड़ी असफलता के होते हैं , किसी रिश्ते के टूटने के होते हैं , किसी अपने को खोने के होते हैं | फिर भी जीवन रुकता नहीं है |  आगे बढ़ता रहता है | उसे आगे बढ़ाना ही पड़ता है |  कभी नीचे झुका कर , कभी हिला कर तो कभी जोर से किक मार कर | एस पड़ाव पर पैशन बहुत काम आता है | वो काम जिसको आप दिल की गहराइयों से चाहते हैं करने में जुट जाने पर काम ही इंसान को नकारत्मकता  से बाहर निकाल लेता है | जैसा सा की मशहूर ग़ज़ल गायक जगजीत ने कहा था की ,

रिश्तों में पारदर्शिता - या परदे उतार फेंकिये या रिश्ते






पारदर्शिता किसी रिश्ते की नीव है | रहस्य के पर्दों में रिश्तों को मरते देर नहीं लगती - बॉब मिगलानी 

                                                                     बचपन में हमारे माता - पिता प्रियजन जो कुछ समझाते हैं उसे हमारा बाल मन कैसे लेता है या उसे कैसे समझता है ये कोई नहीं जानता | माता - पिता या घर के बड़े अपना समझाने का दायित्व पूरा जरूर कर लेते हैं |  और बाल मन किसी अनजाने चक्रव्यूह में फंस जाता है | क्योंकि कभी - कभी समझाई गयी दो बातों में विरोधाभास होता है | और इसके   कारण  न जाने कितने अंधविश्वासो , धार्मिक विश्वासों की जो खेती बाल मन की उपजाऊ भूमि पर कर दी जाती हैं | उसकी फसल कई बार इतनी भ्रम भरी इतनी विषाक्त होती है , जो न बोने वाला जानता है न उगाने वाला |
                                                         ऐसा ही कुछ - कुछ मेरे दिमाग में भरा गया था   की घर की बात बाहर न जाए | विभीषण की वजह से लंका  का सर्वनाश हुआ था | हालांकि ये भी कहा गया था की सदा सच बोलना चाहिए | पर युगों बाद भी विभीषण को यूँ कोसा जाना मुझे भयभीत कर देता था | मेरे बाल - मन में ये तर्क उठते की रावण का नाश उसके कर्मों , उसकी बुराइयों या उसके अहंकार के कारण हुआ,

शनिवार, 25 मार्च 2017

दूसरों को बदलने की चाहत में केवल संघर्ष होगा




कल तक मैं चालाक था इसलिए दुनिया को बदलना चाहता था , आज मैं बुद्धिमान हूँ इसलिए खुद को बदलना चाहता हूँ - रूमी 

                       इसने ऐसा किया होता उसने वैसा किया होता , तो मेरी जिंदगी कुछ और होती | कहीं आप भी ये कहने वालों में से नहीं हैं | उसने नहीं कहा , उसने नहीं किया और आप खुद करने के स्थान पर उम्मीद पाले बैठे रहे की वो करे या कहे | बेहतर न होता की हम उस समय यह मान लेते की कोई कुछ नहीं करेगा जो भी करना है हमें ही करना है | तो शायद आज हम उस जगह होते जो हम चाहते हैं | वो समय उम्मीद में गवायाँ और अब आरोप देने में | 

मृत्यु ...दुनिया से जाने वाले जाने चले जाते हैं कहाँ ?







मृत्यु जीवन से कहीं ज्यादा व्यापक है , क्योंकि हर किसी की मृत्यु होती है , पर हर कोई जीता नहीं है -जॉन मेसन 

                                           मृत्यु ...एक ऐसे पहेली जिसका हल दूंढ निकालने में सारी  विज्ञान लगी हुई है , लिक्विड नाईटरोजन में शव रखे जा रहे हैं | मृत्यु ... जिसका हल खोजने में सारा आध्यात्म लगा हुआ है | नचिकेता से ले कर आज तक आत्मा और परमात्मा का रहस्य खोजा जा रहा है | मृत्यु जिसका हल खोजने में सारा ज्योतिष लगा हुआ है | राहू - केतु , शनि मंगल  की गड्नायें  जारी हैं | फिर भी मृत्यु है | उससे भयभीत उससे बेखबर हम भी | युधिष्ठर के उत्तर से यक्ष भले ही संतुष्ट हो गए हों | पर हम आज भी उसी भ्रम में हैं | हम शव यात्राओ में जाते है | माटी बनी देह की अंतिम क्रिया में भाग लेते हैं | मृतक के परिवार जनों को सांत्वना देते हैं | थोडा भयभीत थोडा घबराए हुए अपने घर लौट कर इस भ्रम के साथ अपने घर के दरवाजे बंद कर लेते हैं की मेरे घर में ये कभी नहीं होगा | अगले दिन उसी छल  कपट के साथ धंधे  व्यापार में लग जाते है |परन्तु एक प्रश्न शाश्वत  रूप से चलता रहता है | आखिर मरने के बाद कहाँ जाते हैं ?या मृत्यु के समय कैसा महसूस होता है