शनिवार, 7 जनवरी 2017

सफलता का मूल मंत्र है ... सपनों में नहीं सपनों को जीना






हां सच होते हैं सपने
जो पकते हैं मन के क्षितिज पर
उगते –ढलते दिन के साथ
जब जल जाती है लौ
द्रण संकल्प , जूनून और कर्मठता की
तब
विवश हो
उतर ही आती हैं परियाँ
सुदूर इन्द्रधनुष से
और खीच देती हैं
हथेलियों पर लकीरे सफलता की
सपने , सपने और सपने …. अनगिनत हज़ार | आँख बंद करते ही कहीं दूर परी लोक से बिन बुलाये मेहमान की तरह चले आते हैं | पर रोज देखे जाने वाले इन सपनों में से कुछ ही होते हैं जो दिन उजालों में भी हमारे साथ होते है | उनकों हम बहुत सहेज कर रखना कहते हैं | क्योंकि वो बड़े ख़ास होते हैं | खुली आँखों के वो सपने होते हैं हमारी इच्छाओं – हसरतों के , कुछ पाने के , कुछ बनने के और सबसे बढ़ कर जीवन में सफल होने के | ऐसे सपने हम सब देखते हैं | इन सपनों में जीते हैं | पर क्या सब सफल हो पाते हैं ? क्या सब के सपने पूरे हो पाते हैं ? उत्तर नकारत्मक हैं | क्यों ? क्योंकी सपनों में जीना और सपनों को जीना इसमें जमीन –आसमान का अंतर है | सफलता के लिए सपने देखना तो जरूरी है ही क्योंकि अगर सपने नहीं देखेंगे तो प्रयास कैसे करेंगे | पर सपनों को पूरा करने के लिए जरूरी है जूनून , पैशन …उदहारण के तौर पर देखिये अगर आप एक कुकर सब्जी ढेर सारे दुनिया भर के अच्छे मसाले डाल कर गैस पर रख दें और गैस जलाये ही नहीं तो
… सब्जी तो पकेगी ही नहीं | उसी तरह से सफल होने का जूनून वो आग है जिसको जलाए बिना सारी मेहनत बेकार चली जाती है , जूनून के लिए जरूरी है आप उस काम को कितना प्यार करते हैं | यह जरूरी नहीं हर व्यक्ति एक ही चीज में अच्छा करें पर अपने करियर के लिए वही चुने जिससे आप को जुनून कि हद तक प्यार हो | जहाँ मेहनत खेल लगने लगे |
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की सफलता का रास्ते में संघर्ष बहुत हैं | जितने भी सफल व्यक्ति हुए हैं उन्होंने असफलताओं के कई दौर देखे हैं , या यूँ कहिये की ३६५ रातें उन्होंने भी देखी हैं पर उन्होंने इस उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा कि रात के बाद फिर से सूरज निकलेगा , चिड़ियाँ चहचहांयेंगी , सवेरा फिर होगा | किसी भी असफलता को आखरी नहीं समझना चाहिए | वास्तव में आखिरी कुछ भी नहीं होता | हर आखिरी बस समय कि दीवार में एक ईंट होती है जिस पर हम सपनों का महल खड़ा कर सकते हैं | हर छोटा कदम महत्वपूर्ण होता है | कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें जूनून तो होता है बड़े मन से काम शुरू करतें हैं , फिर संघर्ष से डर कर आधे रास्ते में ही उसी छोड़ कर कुछ और क्षेत्र खोजने लगते हैं | बस यहीं पर गलती हो जाती है …. जब भी ऐसा मन करे तो ये सोचिये कि आधा रास्ता पार करने के बाद अगर आप पीछे लौटते हैं तो आप को जितना सफ़र तय करना पड़ता है उतने में तो आप मंजिल तक पहुँच जाते |
अंग्रेजी कहावत कहा है , “ रोलिंग स्टोंस गैदर नो मार्क्स “| आप जिस भी क्षेत्र में प्रयासरत हैं निरंतर उसी में लगे रहिये | देर सबेर सफलता आपकी परीक्षा लेना बंद कर ही देगी | चर्चिल का एक सम्बन्ध में एक बहुत ही प्रेरणादायक वाक्य है , “ जब आप नरक से गुज़र रहे हों तो भी चलते रहिये | चलते रहने से बाधाएं अपने आप पार हो जाती हैं | जब हम कील ठोंकते हैं तो कई प्रहार व्यर्थ जाते हैं पर अंतत : किसी एक प्रहार में कील ठुक ही जाती हैं | कई बार हम उस आखिरी प्रहार से पहले ही हिम्मत हार जाते हैं | विजय से ठीक पहले पराजय स्वीकार करलेते हैं | हम भूल जातें हैं कि खरगोश और कछुए कि रेस में जीत आज भी कछुए कि ही होती है | जीत दौड़ कर सुस्ताने से नहीं , छोटे ही सही पर निरंतर प्रयासों का नतीजा है |तो फिर संशय कैसा | ये संशय ही तो बाधक है | या यूँ कह सकते हैं की ये संशय ही वो पर्दा है जो हमारे और हमारी सफलता के बीच में खड़ा रहता है | और हम सफलता के पास होते हुए भी उसे देख नहीं पाते , और निराश हो वापस लौट जाते हैं |
इस निराशा और इस संशय से पार पाने का एक ही तरीका है सकारात्मक विचार | सफलता के मार्ग में सकारात्मक विचारों का बहुत योगदान है | स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है कि , “ तुम जो कुछ सोचोगे, तुम वही हो जाओगे, यदि तुम अपने को दुर्बल समझोगे, तो तुम दुर्बल हो जाओगे। विजेता सोचोगे तो विजेता बन जाओगे। हमारे विचार ही हमें सफल असफल बनाते हैं | विचारों में गज़ब कि चुम्बकीय शक्ति होती है वह अपने समान परिस्तिथियों को खींच कर ले आते है | जिसे सफलता कि कामना है उसे निराशा के स्थान पर सदा सफलता के विचार मन में लाने चाहिए | सफलता के विचार मन में हिम्मत और जोश भरतें हैं और अंतत : सफलता का मार्ग प्रशस्त करतें हैं | इस सन्दर्भ में मुझे एक वृद्ध महिला की बात याद आ रही है जो कहा करती थी , ” दुःख का समय तो झेलना ही है तो सुख के समय में उसे क्यों याद करे | ” शायद ये उसके जीवन भर के अनुभवों का निचोड़ था | तो क्यों न हम उन अनुभवों से अभी से सीख ले लें , और कल क्या होगा इस भय को जगह ही न दें |नकारात्मक विचारों के बाद्फल अपने आप छांटने लगेंगे |
सोचने का असर कितना पड़ता है इस विषय पर एक छोटी सी कहानी याद आ रही है | एक बार की बात है ४ गायकों कि एक ग्रुप था | वो जगह – जगह कंसर्ट करने जाया करते थे | ऐसे ही घुमते – घूमते वो एक गाँव पहुंचे वहां जिस शाम को उनका प्रोग्राम था | गजब का तूफ़ान आ गया | तेज मूसलाधार बारिश होने लगी | नतीजा ये हुआ कि केवल ३ -४ लोग पहुंचे | अब ४ गायकों में से तीन बोले केवल ४ लोग हमें सुनने आये हैं ये तो हमारी कला का अपमान है , इन चार लोगों के लिए हम नहीं गायेंगे | पर चौथा गायक बोला , “ ये तुम्हारे सोचने का नजरिया है , “ मैं तो ये सोच रहा हूँ कि ये लोग हमारे कितने बड़े प्रशंसक है जो इतनी बारिश के बावजूद केवल हमें सुनने आये हैं | मैं तो इनके लिए जरूर गाऊंगा | उसने पुरे ३ घंटे गाना गाया | दूसरे दिन एक राज्य कर्मचारी उसके पास एक मोहरों से भरी थैली और रजा का पत्र ले कर आया | जिसमे उसे राज्य दरबार में गायक के रूप में नियुक्त किया गया था | अगर उसके उस समय अपने दोस्तों कि तरह निराशा भरी बातें सोची होती तो उसे यह सफलता नहीं मिलती |
सौ बातों की एक बात हम समझे या न समझे हमारे मिथक हमें बहुत कुछ समझाते रहे है …. जैसे हनुमान जी का उदाहरण ही ले लीजिये | हम सब के अन्दर एक हनुमान छुपे है , कुछ घबराए से जिनके अन्दर बहुत कुछ करने कि क्षमता है पर जिन्हें अपनी प्रतिभाओं क्षमताओं का पता ही नहीं होता | उन्हें चाहिए एक जामवंत जो बस यह विश्वास भर दे हां तुम कर सकते हों | क्योंकि हर बच्चे में बहुत क्षमता होती है बस जरूरत है उसे अहसास कराने की कि “ तुम कर सकते हो |” ये पोजिटिव विचार वही जामवंत की भूमिका निभाते है | तभी हर बच्चा अपनी क्षमता का १०० % दे सकता है |
सच्चाई यह है की अगर हम अपने आज पर नियंत्रण कर लें तो हमारे अंदर कल का एक बेहद सफल व्यक्ति छुपा है …….. बस जरूरत है बड़े सपने देखने की , पॉजिटिव विचारों से अपने संकल्प को मजबूत करर्नें की और पूरे जोश –खरोश और जूनून के साथ मेहनत करने की … फिर वो दिन दूर नहीं जब सफलता हमारी की मुट्ठी में होगी |दुष्यंत कुमार जी के शब्दों में
 कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं होता
एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों “

वंदना बाजपेयी 

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